बिहार बना देश का सबसे गरीब राज्य, आर्थिक सर्वेक्षण ने खोली हकीकत
बिहार को लेकर एक चौंकाने वाली हकीकत सामने आई है। सुनकर हैरानी जरूर होती है, लेकिन यह पूरी तरह सच है—बिहार आज भारत का सबसे गरीब राज्य बन चुका है। आम बजट से ठीक पहले पेश हुए आर्थिक सर्वेक्षण ने राज्य की अर्थव्यवस्था का ऐसा आईना दिखाया है, जिसने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है।

भारत सरकार के आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, प्रति व्यक्ति सालाना आय के मामले में बिहार 34 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की सूची में सबसे निचले पायदान पर है। रिपोर्ट के मुताबिक, यहां एक व्यक्ति की औसत सालाना कमाई 70 हजार रुपये से भी कम है। इस खुलासे के बाद पटना से लेकर दिल्ली तक राजनीतिक बयानबाज़ी तेज हो गई है।
आम बजट से पहले पेश हुआ आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 बिहार की अर्थव्यवस्था की एक जटिल और विरोधाभासी तस्वीर सामने रखता है। एक तरफ रिपोर्ट यह स्वीकार करती है कि बिहार की विकास दर पूरी तरह निराशाजनक नहीं है, वहीं दूसरी तरफ यह भी साफ करती है कि राज्य अपनी ही पिछली तीन वर्षों की रफ्तार से फिसल गया है। यानी विकास तो हो रहा है, लेकिन उस गति से नहीं, जिसकी उम्मीद सरकार और जनता दोनों को थी। यही गिरती रफ्तार अब सियासी बहस का बड़ा मुद्दा बन गई है।
आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक, बिहार की विकास दर पहले की तुलना में धीमी हुई है, जो चिंता का विषय माना जा रहा है। खासकर तब, जब राज्य पहले ही प्रति व्यक्ति आय के मामले में देश के सबसे निचले पायदान पर खड़ा है। रिपोर्ट ने यह भी उजागर किया है कि विकास के बावजूद आम आदमी की जेब तक उसका असर पूरी मजबूती से नहीं पहुंच पा रहा है। यही वजह है कि आर्थिक आंकड़ों के सामने आते ही पटना से लेकर दिल्ली तक राजनीतिक बयानबाज़ी तेज हो गई है।

मुख्य विपक्षी दल राष्ट्रीय जनता दल ने इस मुद्दे को लेकर नीतीश सरकार पर सीधा हमला बोला है। राजद प्रवक्ता शक्ति यादव का कहना है कि पिछले बीस वर्षों से बिहार की सत्ता की बागडोर नीतीश कुमार के हाथ में रही है, इसके बावजूद राज्य की बुनियादी तस्वीर नहीं बदली। उनका आरोप है कि हर नाकामी का ठीकरा पिछली सरकारों पर फोड़ना अब एक पुराना और घिसा-पिटा बहाना बन चुका है। राजद का सवाल है कि अगर दो दशक तक शासन करने के बाद भी बिहार देश का सबसे गरीब राज्य है, तो इसकी जवाबदेही आखिर किसकी है? विपक्ष इस मुद्दे को जनता के बीच ले जाकर सरकार को घेरने की रणनीति बना रहा है।
आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, वर्ष 2024-25 में बिहार का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वर्तमान मूल्य पर करीब 8 लाख करोड़ रुपये आंका गया है, जो देश के 12 राज्यों से कम है। हालांकि राहत की बात यह है कि बिहार की जीडीपी विकास दर 13.07 प्रतिशत रही है, जो 22 राज्यों से अधिक है। यह आंकड़ा बताता है कि राज्य की अर्थव्यवस्था में संभावनाएं मौजूद हैं, लेकिन चुनौतियां भी उतनी ही बड़ी हैं।
Divya Singh